हमारे संदगुरु माताजी ने जो हमपें क्रपा कह लिजीऐ या सुखो की बारीश करी है उसका स्मरण रहने के लीए यह एक गीत 'बरसा दाता सुख बरसा आंगण आंगण सुख बरसा'
आँगन आँगन सुख बरसा
चुन-चुन काठे नफरत के
प्यारा अमन के फूल खिला
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तन से कोई है दुखी
मन से कोई है दुखी
हे प्रभु दया करो
सारा जहान हो सुखी
हर पल मांगू यही दुआ
आँगन............
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झोलिया सुखो की तुम
सबकी दाता भरही दो
सतगुरु जी तुम हमें
सब्र और शुक्र भी दो
सब के दुखों की तुम हो दवा
आँगन.........
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बैंर क्लेश को मिटा
दाता सकल संसार से
नाम का स्मरण करे
मिलके सारे प्यार से
मानव से मानव होना जुदा
आँगण.......
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Dhan Nirankar ji


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